Monday, October 8, 2007

दिल दोस्ती ई.टी.सी.

आज मैंने एक सिनेमा देखा, लोग काफी चर्चा कर रहे थे कि कालेज राजनीति से संबंधित है, इसलिये सोचा देख लेता हूँ । दिल दोस्ती ई .टी. सी. ,जी हाँ यही सिनेमा का नाम था , इसमें राजनीति कम पर युवा जीवन की सच्चाई ज्यादा देखने को मिली । सिनेमा के पोस्टर पर ही लिखा है कि अगर तुम युवा हो तो संभावनाएं असीमित है । दरअसल मूझे समझ में ये नही आया कि अगर संजय मिश्रा राजनीति में आना चाहता है तो फिर वह भावनात्मक रुप से इतना कमजोर क्यों है । इतिहास में जिसने भी राजनीति चुना है भावनात्मक रुप से मजबूत हुआ है,आप किसी का भी उदाहरण देख सकते हैं ।पर ये सिनेमा आज के युवा वर्ग की मानसिकता को बिल्कुल सही तरीके से उकेरा है । प्रेरणा उससे प्यार नही करती थी वो तो उसके लोकप्रियता से आकर्षित हुई थी । मगर जब सारे महत्वपूर्ण लोग ये कह रहे थे कि वो साधारण है ,अपूर्व महत्वपूर्ण है तो फिर मैं प्रेरणा की मानसिकता समझ सकता हूँ ,आख़िर वो भी एक लड़की थी । जहाँ तक अपूर्व की बात है तो उसे इसी बात के लिए प्रशंसा ही की जा रही थी ,यहाँ तक कि संजय के भी द्वारा ,तो फिर उसे उतना ज्यादा गलत नही ठहराया जा सकता है । शायद गलत आदमी नही ,फैसले गलत थे और संभावनाओं की असीमितता की जानकारी किसी को नही थी । इस सिनेमा में बस बताया गया है कि युवाओं को फैसले सोच-समझकर लेना चाहिए और संभावनाओं की अनदेखी नही करनी चाहिए । आखिरकार सिनेमा के अंत में किसी को कुछ नही मिला और सबने अपना सबकुछ खो दिया जो उसे मिलना चाहिए था ,और जो उसके लिए बहुत अच्छा रहता । इसीलिये युवाओं को याद रखना चाहिए की संभावनाएं असीमित है और वो सोच-समझकर फैसला लें ।

1 comments:

आलोक said...

वाह। मेरे हमनाम। मिल के खुशी हुई।
चेंपे रहिए,
आलोक