ये लेख मैं अपने सन्स्थान के हिंदी मासिक अखबार 'आवाज़' के लिखी थी...पढने वालों ने बहुत पसंद किया था ...
एक छोटा सा कमरा,जिनमें दो छोटी-छोटी जिंदगियां और दोनो की छोटी-छोटी तमन्नायें,उन्ही तमन्नाओं में एक दिन टकराव होता है और हम उस टकराव के कारण का पता लगाने निकलते हैं। तब जो एक समस्या खुलकर सामने आती है,वह एक म्यान दो तलवार से मिलती-जुलती प्रतीत होती है ,तो चलिए समस्या की गहरायी में पैठ लगाकर देखते हैं ।
मेरे पड़ोस के ही कमरे में दो मित्र थे,दोनो एम.आई. के लिए काम करते थे । अब एम.आई इतना बड़ा सांस्कृतिक मेला है ,सी.जी.बनने का मन सबको हो जाता है और दोनो एक ही विभाग में काम भी करते थे । अतः दोनो को अपने विभाग के सी.जी. को प्रभावित करने के लिए अपने-अपने कौंप पर infinite (अत्यधिक) काम करने पड़ते थे । अब कमरे की हालत या तो कमरा ही बताये या उस कमरे के लैन का वो तार जिनकी खिंचायी होती रहती थी लगातार और झंझट होते थे जिनके लिए दिन में पचास बार । अब ये सी.जी. कौन बना हम पता कर ही सकते हैं पर सोच रहा हूँ कि उस लैन के तार का क्या हुआ होगा ?विश्वासपात्र सूत्रों से पता चला है कि उसकी हालत वही हुई जो इस वक़्त उन दोनो के जिगरी दोस्ती कि है ...
अब ये समझाना तो कठिन ही होगा कि इस एक लैन दो कौंप प्रणाली से कितने रिश्ते-नाते प्रभावित हुये हैं ,फिर भी बताने लायक एक और मामला है जो कि बहुत आम है । मेरे एक परम मित्र हुआ करते थे,उनका एक कन्या से दिल का मामला था । मामला तो ये भी था कि उनके कक्ष सहपाठी भी उन्ही कन्या पर फिदा थे । उधर कन्या नेट पर उपस्थित होती थी और इधर लैन का तार सनसनाता हुआ उसके साथी के कौंप में प्रविष्ट कर जाता था । मेरे मित्र संकोची स्वभाव के थे ,भावनाओं को तो रोक लेते थे मगर कमरे में नही रूक पाते थे। उनकी विपत्ति के वो क्षण मेरे कमरे में बीता करते थे और उनका भरपूर फायदा उठाते हुए मैं ना जाने कितनी दर्द भरी कविताओं की पोटली उस दौरान उन्हें दवा के रुप में पिला दिया करता था । इन सबका असर ये रहा कि कालांतर में उनका अपने कमरे से दुराव बढ़ता चला गया । अब तक तो वो कमरा भी बदल चुका है और उनके दिल के इरादे भी जो कभी किसी के लिए हुआ करते थे ।
Sunday, October 14, 2007
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
2 comments:
बढ़िया लेखन है.
उनकी विपत्ति के वो क्षण मेरे कमरे में बीता करते थे और उनका भरपूर फायदा उठाते हुए मैं ना जाने कितनी दर्द भरी कविताओं की पोटली उस दौरान उन्हें दवा के रुप में पिला दिया करता था
"very interetsing artical with sentiments"
Regards
Post a Comment