Wednesday, November 7, 2007

कहानी जिन्दगी की

कहानी- ये शब्द सुनते ही आपके मन में पात्र और घटनाएं याद आ जाती है । सचमुच कुछ पात्र और घटनाओं का सामंजस्य ही कहानी का निर्माण करता है । कुछ मनगढ़ंत तो कुछ कहानी वास्तविक भी होती है जो किसी जीवन से संबंध रखती है । इसका मतलब ये कह सकते हैं कि कहानियां लोगों के जीवन पर आधारित होती है ,पर कभी ऐसा सुना है कि किसी का जीवन कहानियों पर आधारित हो । जी हाँ ,ऐसा मुश्किल तो है पर शायद असंभव नही कि कुछ जीवन कहानियों पर आधारित हो जाये ।कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि वो अपनी कहानी का नायक खुद को ही समझता रहता है और अंत में पता चलता है कि कहानी में तो उसकी भूमिका थी ही नही । अब मैं हद कह रहा हूँ ,भला किसी की कहानी में उसी की भूमिका कैसे नही रहेगी । चलिए मान लेता हूँ कि उसकी भी भूमिका होगी पर शायद मेहमान पात्र के जैसा उसका छोटा सा किरदार होगा । अब सोचिये वो तो अपनी कहानी का नायक मान कर चल रहा था ,अब उसपर क्या बीत रही होगी । दरअसल शायद मेरी बात कल्पना मात्र लगे पर जब जिन्दगी कहानियों पर चलने लगे तो अक्सर यही होता है । इसीलिए जीवन कहानियों पर नही बल्कि जीवन पर कहानियां आधारित होती है :)

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