Monday, July 28, 2008
पानी-पानी होती मुंबई की सड़कें
चौंकिये मत, सचमुच इस वक़्त मुंबई की सड़कें पानी-पानी हो रही है । ऎसी बात नही है कि सड़कों ने कोई गुनाह किया हो और मुझे ऐसा कहना पड़ रहा है , दरअसल ये तो घनघोर बरसात की करतूत है । मानसून की मुसलाधार बौछार ने मुंबई के सड़कों का नजारा ही बदल कर रख दिया है । ये तो मुंबई ही है जो कि इतनी बारिश में भी दौड़ रही है । पहले तो मैं बंबई लिखने वाला था , लेकिन अचानक ये सोचकर डर गया कि कही पाठकों में से कोई राज ठाकरे का समर्थक निकल गया तो पता नही क्या कोहराम मच जायेगा । सुना है कि वे लोग सेंसर बोर्ड को भी धमकी दे चुके हैं कि आगे से अगर किसी भी फ़िल्म में बंबई का प्रयोग देखो तो उसे प्रमाण पत्र मत देना । हो सकता है मेरा भी ब्लॉग जाली करार दिया जाए ,या मैं वैसे ही बिहार का हूँ ,पता नही कल मनसे के लोग मनोज बाजपेयी के घर को तोड़-फोड़ डालें । इसीलिए मैंने कोई ग़लती नही की और याद करके मुंबई ही लिखा । पर मैं तो पानी की बात कर रहा था , बात ये भी है की इस पानी ने मेरे स्वास्थ्य पर भी पानी फेर दिया । पिछले दो दिनों से मैं बीमार बैठा हूँ और दवा भी नहीं खा रहा हूँ क्योंकि मेरा मानना है कि जो बीमारी प्राकृतिक हो ,उसका इलाज भी प्राकृतिक ही होना चाहिए । वैसे आज मैं आराम महसूस कर रहा हूँ ,और अपने खिड़की से बारिश की रिमझिम देखते हुए, अपने चिट्ठे पर लिख भी रहा हूँ । इस लगातार बारिश से मुंबई को एक फायदा तो जरूर होगा ,सीमी वाले इतनी बरसात में सायकिल से अगर बम ले जायेंगे तो बम रास्ते मेंं ही भींग जायेगा । चलिए जब तक बरसात चलती रहे तब तक बम का डर नही है , मगर इसी तरह बरसात चलती रहे तो पूरा मुंबई पानी-पानी हो जायेगा।
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4 comments:
सच पर आधारित लेख लिखा है आपने। हमारे देश में इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता।
एक इंजीनियर के नाते आपने अच्छा लिखा। युवा सोंच ऐसे ही होने चाहिए
सही लिखा..आज कल महौल भी खराब है और मौसम भी।
आभार ..!!
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