Friday, August 29, 2008

कितने सारे आय.आय.टी.!!!

ये कहानी थोडी ऎसी है कि एक बार मंत्रीजी को सपने में साक्षात भगवान के दर्शन हो गए। भगवान उनसे पूछ बैठे कि आख़िर उन्होंने दुनिया को दिया ही क्या है। मंत्रीजी तपाक से बोल पड़े:- सात आय.आय.टी. । सुबह नींद से जागकर मंत्रीजी को शंका हुई कि कहीं उसने भगवान से भी तो झूठ नहीं बोल दिया, क्योंकि सात आय.आय.टी. तो पहले से ही थे। उन्होंने तुंरत अपने सेक्रेटरी को बुलाया और कहा कि फ़ौरन पूरे देश में सात जगहों पर भूमि तलाश करो ।
सेक्रेटरी(जम्हाई तोड़ते हुए ): मसला क्या है ?
मंत्रीजी :- आय.आय.टी. खोलनी है ।
सेक्रेटरी ने आनन-फानन में ही सारे अधिकारियों की मुलाक़ात बुलवा ली । जम्मू से लेकर कन्याकुमारी तक की जमीन को टटोला गया और पूरी छानबीन की गयी। एक गांधीवादी अधिकारी जोर देकर बोलने लगे कि बापू की जन्मभूमि अबतक आय.आय.टी. विहीन है, वहाँ तो इसबार आय.आय.टी. खुलना ही खुलना चाहिए । इसके बाद पंजाब और राजस्थान में भी काफी जमीन मिल गयी जहाँ आय.आय.टी. ही बन सकता था। भुवनेश्वर के बाद हैदराबाद की जमीन पर मुहर लगाया गया। तभी एक अधिकारी जो बिहार के थे उनका धीरज डोल गया और वो बोलने लगे कि आख़िर बिहार को सबलोग क्यूँ भूल जाते हैं विकास के नाम पर , आख़िर पटना में भी तो इतनी भूमि खाली है । मगर सातवाँ आय.आय.टी. सबके लिए सरदर्द बन रहा था तभी मंत्रीजी का फ़ोन आ गया कि इस बार के बजट से केवल छः ही आय.आय.टी. बनाए जा सकते हैं । मंत्रीजी का मानना था कि छः आय.आय.टी. बनाने के बाद तो अगली बार पुनः चुनाव जीत ही जायेंगे तब बचा हुआ ये सातवाँ क्या पूरे सात और आय.आय.टी. बना देंगे ।

3 comments:

Udan Tashtari said...

सही है. :)

Hari Joshi said...

अंदाज अच्छा है।

योगेन्द्र मौदगिल said...

बिल्कुल ठीक..........