Wednesday, September 10, 2008

जयाजी के हिन्दी प्रेम को चुकानी पडी महंगी कीमत

सचमुच जयाजी को अगर ये पता रहता कि उसे और अमिताभ को उसके हिन्दी-प्रेम की इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी तो वह भी हिन्दी के वजाय अंगरेजी से ही काम चला लेती। अब एक स्टार होने का मतलब ये नहीं कि उसे ग़लती करने का अधिकार भी न हो । क्योंकि मैं तो अक्सर ये गलती करता हूँ कि मैं बिहार का हूँ इसलिए मैं हिन्दी ही बोलूँगा ,मुंबई वालों से माफी चाहता हूँ। इसपर लोग हंस देते हैं या ताली बजा देते हैं, मुझे इसकी न ही सफाई देनी पड़ती है और न ही इसकी कोई कीमत, क्योंकि मैं कोई स्टार नहीं हूँ। इसीलिए सामाजिक स्तर पर भले ही जयाजी से गलती में गलती हो गई हो क्योंकि जिसका सामाजिक मूल्य बहुत ज्यादा होता है उसे अपने व्यक्तिगत भावनाओं पर काबू रखना होता है जिसे जयाजी भूल गई थी। मगर जहाँ सवाल एक व्यक्ति का उठता है वहीं कई विवाद कठघरे में आ जाते हैं। शायद यही कारण है कि हिन्दी-प्रेम के बाबजूद भी बड़ी हस्तियाँ अंगरेजी का ही प्रयोग करना उचित समझती है और उसकी नक़ल करते हैं हम जैसे साधारण लोग और अंग्रेजियत हमारे देश पर कब्जा जमा लेती है। भला मराठी जानने और समझने तथा मराठी से इतना प्रेम करने वाली जयाजी (अमिताभ काब्लॉग ) मराठी के विरोध में बोलना तो दूर सोच ही कैसे सकती है ,ये सोचने का विषय है । दरअसल उनका मतलब था कि वो आज अंग्रेजी में नहीं हिन्दी में बोलेगी क्योंकि वो महाराष्ट्र जैसे आधुनिक राज्य से नहीं बल्कि उत्तर-प्रदेश जैसे साधारण राज्य से हैं । जी हाँ उनके भोले और सरल व्यक्तित्व ने तो अंगरेजी का विरोध किया था जो कि हमेशा सितारों वाले समाज में प्रयोग की जाती है , मगर उनका अग्रेजी के प्रति विरोध को लोग मराठी विरोध मान लेंगे अगर उसकी भावनाएं पहले समझ जाती तो वो अंगरेजी में ही बोल जाती । इस विरोध से हिन्दी को ये नुक्सान हुआ कि आज के बाद मुंबई में कोई भी स्टार हिन्दी नहीं बोलेगा और हिन्दी-प्रेम को दबाकर रख लेगा । हमारा समाज जो नक़ल कि धुन पर चलता है वो भी यही समझेगा कि स्टारों की भाषा अंग्रेजी है इसलिए अंग्रेजी महान है और हिन्दी बकवास। आख़िर क्षेत्रीय राजनेताओं को कब अकल आयेगी कि हिन्दी की प्रतियोगिता अंग्रेजी के साथ है उसके क्षेत्रीय भाषा के साथ नहीं और हिन्दी किसी क्षेत्र विशेष की भाषा नहीं पूरे देश की भाषा है जो अग्रेजी और चीनी के बाद दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली एक भाषा है। अगर हम इसी तरह हिन्दी को भी क्षेत्रीय भाषा मानकर अपने-अपने क्षेत्रीय भाषा से उसकी प्रतियोगिता रख देंगे तो विश्व की इतनी बड़ी भाषा होने के बाबजूद भी उसे वो सम्मान नहीं मिल पायेगा जो कि जर्मन, फ्रेंच या जापानी जैसी छोटी भाषाओं को भी प्राप्त है। इसीलिए आगे से किसी स्टार का विरोध करने से पहले हमें बहुत विचार करना चाहिए ।

7 comments:

seema gupta said...

"very well said, interesting to read on this conflict..."

Regards

संगीता पुरी said...

अगर हम इसी तरह हिन्दी को भी क्षेत्रीय भाषा मानकर अपने-अपने क्षेत्रीय भाषा से उसकी प्रतियोगिता रख देंगे तो विश्व की इतनी बड़ी भाषा होने के बाबजूद भी उसे वो सम्मान नहीं मिल पायेगा जो कि जर्मन, फ्रेंच या जापानी जैसी छोटी भाषाओं को भी प्राप्त है। इसीलिए आगे से किसी स्टार का विरोध करने से पहले हमें बहुत विचार करना चाहिए ।

कितनी अच्छी बात कही आपने।

महामंत्री-तस्लीम said...

यह इस देश का दुर्भागय है कि किसी सही बात को गलत ढंग से ही लिया जाता है।

Udan Tashtari said...

अच्छा आलेख!!

Richa Joshi said...

अगर राज ठाकरे को लगता है कि वह भाषाई या क्षेत्रीय राजनीति के सहारे वोटों की रोटियां सेंक लेंगे तो ये कभी भी दीर्घकालिक नहीं हो सकता।

Krishna Kumar Mishra said...

अरे भाई ये सब बडे लोगो के चोचले है भारत जातियता और धर्म के नाम पर कम बटा है भाषा के नाम पर ज्यादा इतिहास उठा कर देख ले इस लिये इन मुद्दो पर किसी को कभी कोइ कमेन्ट नही करनी चाहिये और मीडिआ को भी हल्ला कम मचाना चाहिये और भी मुद्दे है जहां मे बच्चन और ठाकरे के शिवा .........

आलोक कुमार said...

अब भाई जहां में बहुत मुद्दे हैं तो जहां में बहुत सारे लोग भी हैं, मूझे जो मुद्दा संवेदनशील लगेगा मैं तो उसी पर लिखूंगा भले वो आपकी संवेदनाओं को नहीं छुए...बाक़ी मुद्दे के लिए तो आपलोग लिखिए मैं पढ़ा करूंगा :)