Monday, September 22, 2008

सी.ई.ओ. की हत्या एक उभरती चेतावनी

आज की एक ख़बर ने भारतीय उद्योग जगत का चेहरा दुनिया में शर्मशार किया है। अगर किसी कारखाने में व्यवस्था और कामगारों के बीच हाथापायी भी हो जाए तो ये उस देश की उद्योग नीति की कमजोरी को उजागर कर देती है परन्तु यहाँ तो मामला हत्या की हो गयी है। जिस तरह राजधानी दिल्ली के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र ग्रेटर नोएडा में इलेक्ट्रोनिक्स कंपनी के सी.ई.ओ. को असंतुष्ट कर्मचारियों ने मार-पीट कर हत्या कर दी है उससे विश्व में भारतीय उद्योग की निंदा जरूर होगी। अब कोई भी बहुराष्ट्रीय कंपनी भारत में उद्योग स्थापित करने से पहले जरूर सोचेगी और शायद हिचकिचाए भी। इससे पहले सिंगुर-विवाद ने भी एक बहुत ग़लत प्रभाव छोड़ा था और अब ये ज्वलंत मामला। क्या हमारे देश में उद्योगों के लिए कोई व्यवथित नियम नहीं है कि आम जनता को हर समय नियम और कानून अपने हाथों में लेना पड़ता है।
एल.के.चौधरी ने तो बस अपने शीर्ष प्रशासन के हुक्म पर अमल किया होगा और उसे अपनी जान से हाथ धोनी पडी। उनके परिवार को इस कठिन घडी में मेरी सहानुभूति है मगर हम इस मामले को एक ही पहलू से नहीं देख सकते। आख़िर कामगारों के अत्यधिक गुस्से का कारण इतना आसान नहीं हो सकता, कहीं न कहीं प्रशासन भी गुनाहगार है । तो क्या इन नीजी कंपनियों के लिए कोई पक्के नियम और क़ानून नहीं है सरकार की ओर से जो ये अपनी मनमानी करते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो ये सी.ई.ओ.की मौत सरकार को एक चेतावनी है कि नीजी उद्योगों में हस्तक्षेप करे। आख़िर उस मुनाफा का किसी को क्या लाभ जिसमें जान ही चली जाए। साथ ही साथ इस घटना की कड़ी निंदा होनी चाहिए और दोषी कर्मचारियों को उचित दंड भी मिलना चाहिए जिससे उद्योग जगत के अनुशासन तोड़ने वालों को भी सरकार की ओर से चेतावनी मिल जायेगी।

3 comments:

रंजन राजन said...

इस घटना की कड़ी निंदा होनी चाहिए और दोषी कर्मचारियों को उचित दंड भी मिलना चाहिए

रंजन राजन said...

यह पोस्ट कॉपी कर
http://impact25.blogspot.com
पर डाली गई है। पोस्ट की चोरी करने वालों को शर्म आनी चािहए।

seema gupta said...

"very very shameful incedent, of course proper investigation and punishment is required"

regards