Thursday, October 2, 2008

धुम्रपान पर प्रतिबंध का नियम कितना प्रभावकारी

आज बापू के जन्मदिवस की शुभकामनाओं में समूचे देश को एक नियम का सौगात मिला है और हम उस नियम का स्वागत करते हैं। आज से सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना कानूनी तौर पर अपराध माना जायेगा और धूम्रपान करने वालों को २०० रूपये जुर्माना भी हो जायेगा। अपने फिक्र को धुएँ में उडाने वाले आज से संभल कर रहें, कम से कम ऐसे हालत मत पैदा करें कि दूसरों को धुएँ की फिक्र होने लगे। पर सवाल है कि क्या यह नियम प्रभावकारी हो पायेगा? हो सकता है कि लोग अब भी खुलेआम धूम्रपान करे और अगर गलती से पकड़े गए तो १०-२० रूपये में छूट जाएँ । हमारी पुलिस विभाग को बहुत ही तैयार और ईमानदार होने की जरूरत है। मुझे इससे कोई मतलब नहीं कि ये नियम कितना प्रभावकारी होता है मगर मैं समझता हूँ कि ये नियम बहुत ही सार्थक है। अभी तक अगर आप किसी के धूम्रपान से परेशान भी होते तो आप उसे टोकने में हिचक सकते थे कि पता नहीं वह क्या जवाब दे, वो आपकी भावनाओं का निरादर भी कर सकता था । परन्तु अब आपके साथ ये नियम रहेगा, इसलिए कम से कम ये नियम इतना प्रभावकारी तो जरूर है।
आज के किशोरों की जिन्दगी धुएँ में सिसकती जा रही है , किशोर तनाव ( dipression) के कारण, समूह में एक-दूसरे की देखा-देखी, अपने को अलग दिखाने की प्रवृति(egoism) के कारण धूम्रपान की आदत डाल लेते है जिसे फिर दूर करना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। समस्या ये है कि वो छिपकर ये कार्य करते हैं, और उसे ग्लानी भी महसूस नहीं होती है । इसका कारण है कि वो अपने पसंदीदा स्टारों को परदे पर कश लेते हुए देखता है , सुंदर विज्ञापनों में यही देखता है और इससे भी ज्यादा वह सार्वजनिक जगहों पर वह अपने शिक्षकों और अभिभावकों को भी धूम्रपान करते हुए पाता है । फ़िर उसे लगता है कि ये कोई ग़लत नहीं है , अभी उम्र कम है छिपकर पी लेता हूँ और दो साल बाद खुलेआम पिया करूंगा । और इस तरह वह एक भयानक लत से पीड़ित हो जाता है । इस तरह धूम्रपान प्रतिबंध का नियम शायद किशोरों को यह भी अवगत करा दे कि ये एक अपराध है तो जरूर किशोरों में धूम्रपान की समस्या कम हो जायेगी और उनका किशोरापन धुएँ में सिसकने से भी बच जायेगा ।