Thursday, October 8, 2009

विदेश मत जाओ पारो

मेरी प्रिये पारो
बहुत बहुत प्यार!!
मैं देवदास हूँ, सब कुशल-मंगल है, आशा करता हूँ कि तू भी कुशल ही होगी। चुन्नीलाल कल मदिरालय में मिला था, मुझसे कह रहा था कि पारो हारवर्ड कालेज पढने लंदन जा रही है। सुनकर मुझे बहुत दुःख हुआ, और इसी दुःख में बहुत सारा मदिरा पी गया। कल मैं इतने नशे में था कि चंद्रमुखी भी अपने कमरे में नही घुसने दी। सारी रात मैं बाहर ही भटकता रहा और चाँद के ऊपर दाग देखकर 'चाँद जैसी लड़की' को याद करता रहा। सच पारो, कल मैं बहुत रोया था, पूरा Night-out मारा हूँ और सुबह-सवेरे तुम्हें प्रेम-पत्र लिख रहा हूँ। ये पत्र भी मैं फूटपाथ से ही लिख रहा हूँ, आशा करता हूँ कि तुम्हें पसंद आएगी। मुझे आशा कम विश्वास बहुत है कि पत्र पढ़कर तुम मुझसे मिलने जरूर आओगी। आओगी न पारो? हाँ आओगी, मुझे पता है । वैसे तुम लंदन पढ़ाई करने क्यों जा रही हो, मत जाओ, अअअ अच्छी जगह नहीं है। अरे मैंने भी तो दस साल लंदन में पढ़ाई की थी, की थी कि नहीं उंउं...क्या बना मैं, एक सुट्टेबाज और मदिराबाज, और क्या? देखो पारो, मैं दस साल तक लंदन में था, और तुम मेरा इंतजार करती रही, अपने दिए को हवा के झोंको में भी जलाकर रखा था। अब तुम जा रही हो, मैं क्या जलाऊंगा तुम्हारी याद में उंउं...मेरे पास तो बस सिगरेट...हाँ सिगरेट है। देखो मैं सिगरेट को बुझने नही दूँगा, डाक्टर ने चुन्नी भाई को बताया था कि मुझे कैंसर हो गया है। तुम कहीं एक साल भी लंदन में पढ़ लोगी तो ये सिगरेट तो नहीं बुझेगा मगर मममैं बुझ जाऊंगा। मुझे बचा लो पारो....विदेश मत जाओ पारो....मुझे बचा लो प प पारो।
तुम्हारे प्यार का मारा
देवदास 'बेचारा'

-ये आज प्रेम पत्र लेखन प्रतियोगिता "दिल से" में मैंने लिखा था जिसका विषय था कि विदेश पढने जा रही प्रेमी/प्रेमिका को प्रेम-पत्र लिख कर रोकने का प्रयास करो-

2 comments:

Udan Tashtari said...

सिगरेट ही जला लो मित्र...

आजकल बिना एस एम एस के कौन सी पारो रुकती है..किसके पास इतना बड़ा खर्रा पढ़ने का समय है

और फिर, देवदास, तुम तो जानते ही हो कि मेकअप भी कराना है. :)

आलोक कुमार said...

ha ha ha.... aap kahte hain to cigarette jala liya mere devdas ne:))